रथ सप्तमी: जानिए इस त्योहार का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
रथ सप्तमी हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य देव की पूजा की जाती है।
रथ सप्तमी 2024:
- तिथि: 16 फरवरी 2024, शुक्रवार
- शुभ मुहूर्त:
- सूर्योदय: 06:53 AM
- पूजा का समय: 07:00 AM - 09:00 AM
- रथ सप्तमी स्नान मुहूर्त: 05:17 AM - 06:59 AM
रथ सप्तमी का महत्व:
- रथ सप्तमी का दिन भगवान सूर्य देव के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
- इस दिन भगवान सूर्य की पूजा करने से आरोग्य, धन, समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
- रथ सप्तमी के दिन व्रत रखने से भी विशेष फल प्राप्त होते हैं।
रथ सप्तमी की पूजन विधि:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के पूजा स्थान में भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित करें।
- फल, फूल, मिष्ठान, और दीप आदि से भगवान सूर्य की पूजा करें।
- "ॐ आदित्याय नमः" मंत्र का जाप करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- आरती करें और भगवान सूर्य से आशीर्वाद प्राप्त करें।
रथ सप्तमी व्रत के नियम:
- इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए।
- पूरे दिन व्रत रखना चाहिए और केवल एक बार भोजन करना चाहिए।
- भोजन में सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
- झूठ नहीं बोलना चाहिए और किसी को भी कष्ट नहीं देना चाहिए।
- दान-पुण्य करना चाहिए।
रथ सप्तमी का महत्व:
रथ सप्तमी का दिन भगवान सूर्य देव की पूजा करने का उत्तम दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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- रथ सप्तमी का व्रत
रथ सप्तमी: सूर्य देव को समर्पित एक पावन हिंदू त्योहार
रथ सप्तमी, जिसे सूर्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य देव की पूजा की जाती है, जिन्हें सृष्टि के स्रोत, जीवन और ऊर्जा के दाता के रूप में माना जाता है। रथ सप्तमी का शाब्दिक अर्थ है "रथों का सातवां दिन"। यह इस विश्वास से जुड़ा है कि इस दिन सूर्य देव अपने सात घोड़ों द्वारा खींचे गए रथ पर स्वर्ग की ओर अपनी यात्रा शुरू करते हैं।
रथ सप्तमी का भारत में व्यापक रूप से हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह विशेष रूप से ओडिशा, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में महत्वपूर्ण है। त्योहार के दिन, भक्त जल्दी उठकर स्नान करते हैं और नए वस्त्र धारण करते हैं। वे अपने घरों में या मंदिरों में भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित करते हैं और उन्हें फूल, फल, मिठाई और जल चढ़ाकर उनकी पूजा करते हैं। सूर्य मंत्रों का जाप किया जाता है और भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए आरती की जाती है। कुछ भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं।
रथ सप्तमी का महत्व कई हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य की पूजा करने से सुख, समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह माना जाता है कि सूर्य देव की कृपा से रोग दूर होते हैं, ग्रहों के बुरे प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सफलता मिलती है।
रथ सप्तमी के दिन कई तरह के लोकप्रिय आयोजन होते हैं। सबसे प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव है, जो विशेष रूप से ओडिशा के पुरी में होता है। इस उत्सव में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की विशाल रथों की शोभायात्रा निकाली जाती है। रथ यात्रा लाखों भक्तों को आकर्षित करती है और इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।
रथ सप्तमी के अलावा, भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रथ सप्तमी को मनाने के लिए कई अन्य पारंपरिक तरीके हैं। उदाहरण के लिए, गुजरात में, लोग इस दिन अपने घरों के बाहर रंगोली बनाते हैं और सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष व्यंजन बनाते हैं। कर्नाटक में, लोग सूर्य मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं और सूर्य देव को चावल और गुड़ चढ़ाते हैं। उत्तर प्रदेश में, लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
रथ सप्तमी एक ऐसा त्योहार है जो न केवल हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रकृति और उसके तत्वों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है। सूर्य देव को सृष्टि के लिए ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, और रथ सप्तमी के दिन उनकी पूजा करके हम उनके प्रति अपना सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं।
Note:
- यह जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है।
- किसी भी व्रत या पूजा को करने से पहले किसी विद्वान से सलाह अवश्य लें।

